1. मंजपुर

1. मंजपुर — चित्र 1

आगे मापरु असन परकार ले सबू जमके के रचना करला। हाँय छय दिनने मंजपुर आवरी जोनआचे हाँय सबूके रचला, जेबे मापरु धरती के बनायला, तेबे धरती आंधार आवरी मेला रला, काय काछे बलले, मापरु हाँय ताने काई के ना बनाय रला। मातर मापरुर आतमा पानी उपरे पोंहरते रबार आय।

1. मंजपुर — चित्र 2

मापरु आवरी बोलला, “ऊजर वो आवरी ऊजर होयला।” मापरु दखला ऊजर अचा आचे आवरी ऊजर के “दिन” बोलला आवरी, हाँय ऊजर के आंधार ले गुचायला, आवरी आंधार के हाँय “राती” बोलला। मापरु मंजपुर ने आगर दिने ऊजर के बनायला।

1. मंजपुर — चित्र 3

मंजपुरर पाछर दिने मापरु बोलला, “पानीर उपरे गोटक फरक वो।” आवरी गोटक फरक होयला। मापरु ऐ फरक के “बादरी” बोलला।

1. मंजपुर — चित्र 4

तीन दिनर पाछे जेबे मापरु बोलला, “पानी गोटक लगे होईजा आवरी सुखला भूई दखा देस”। मापरु सुखला भूई के “धरती” आवरी पानी के “समुदर” बोलला। मापरु दखला जोन हाँय बनायरला हाँय अछारला।

1. मंजपुर — चित्र 5

आवरी मापरु बोलला, “धरती ताने सबू किसमर बूटा – लाटा जागो”। आवरी असनी होयला। मापरु दखला हाँय बनायरला, अछारला।

1. मंजपुर — चित्र 6

रचलार चार दिनने मापरु बोलला, “बादरी ने गरह वो”। आवरी बेर, जोन, आवरी तारा मन दखा देलाय। मापरु हाँय मन के धरती ताने ऊजर करबा काछे आवरी दिनबेरा आवरी रातिबेरा मोसम आवरी बरसर चिना देबाकाचे बनायला। मापरु दकला जाके हायं बनाय रला। हायं सुन्दर रला।

1. मंजपुर — चित्र 7

पाच दिनने मापरु बोलला, “जीवधारी पानी ने भरौत आवरी बादरी ने पक्षी उड़वोत।” ये परकार ले हाँय पानी ने पोंहरबार सबू जंतु के आवरी पक्षी मन के बनायला। मापरु दखला अछा रला आवरी हाँयमन के वर देला।

1. मंजपुर — चित्र 8

रचना करलार छय दिनने मापरु बोलला, “भूई ताने रबार सबू परकारर जानवर जनमोत।” आवरी मपरुर बोललार असन होयला कोनी जानवर पोसबाटा रलाय, कोनी भूई ने रंगबाटा, आवरी कोनी झारर जानवर रलाय। मापरु दखला ऐअछा रला।

1. मंजपुर — चित्र 9

आवरी मापरु बोलला, “आसा हामी मुनुक के आपनार रूप ने आवरी आपनार बराबर अमता बनायबू ऐ धरतीर आवरी सबू जनावर उपरे राज करोत।”

1. मंजपुर — चित्र 10

तेबे मापरु माट्टी तानले मुनुक के बनायला आवरी हाँयताने जीवर फूंडा के फूकी देला। ऐ मुनुकर नाव आदम रला। मापरु आदमर रबा काछे गोटक बड़े ठोठा के बनायला आवरी एतार राखा करबा काछे आदम के हाँयताने सोंगायला।

1. मंजपुर — चित्र 11

हाँय ठोठार मोजिगता मापरु दुयटा विशेष गछ रोपला, जीवर गछ आवरी, नगत आवरी गलत ज्ञानर गछ। मापरु आदम के आज्ञा देला, ” तुय टोटार सबु गचर फल के खायके सकिस, मातर अच्छा आवरी पापेर ज्ञानर जोन गच आचे, हातार फल के तुय केबी ना खा, कसन बलले, जोन दिने तुय हाँय फल के खायबीस हाँय दिने सते मरबीस।”

1. मंजपुर — चित्र 12

मापरु आवरी बोलला, “मुनुकर ऐकला रबार अछा नाई”। मातर कोनी पने जानवार आदमर सहायक ना होयलाय।

1. मंजपुर — चित्र 13

ऐईकाचे मापरु आदम के खुबे नींद देला। तेबे मापरु आदमर गोटक हाड़ा दरी करी हाँयतानले बायलेर रचना करला आवरी ताके आदम लगे आनला।

1. मंजपुर — चित्र 14

जड़कदाय आदम ताके दखीकरी हाँय बोलला, “मुई जसन आय ऐ पने असनी आय। ऐ “बायले” बोलाय होयसी, कसन बोलले ऐ मुनुकले बनायलार आचे”। ऐईकाचे मुनुक आपनार आया-बुआ के छाड़ी देउआय आवरी आपनार बायले सगे गोटक हौआय।

1. मंजपुर — चित्र 15

मापरु मुनुक आवरी बायले के आपनार रूप ने बनायला। हाँय हाँयमन के वर देला आवरी बोलला, “खुबे बेटा-बेटी आवरी नाती-पुती जनम दियास आवरी धरती ने भरा।” आवरी मापरु दखला जाकेपने बनायलार रला कुबे अछा रला, आवरी हाँय ऐ सबु ले खुबे हरिक रला। ऐ सबु धरती ने बनायलार छय दिन होई रला।

1. मंजपुर — चित्र 16

सात दिन होयबाके जोन पने मापरु करी रला सबु काम के सरायला। हाँय सात दिन के वर देला आवरी ताके पवितर बोलला, कसन बोलले हाँय दिने सबूके रचना करबार सरायरला। ऐ परकार ले मापरु मजपुरर आवरी जोन पने हाय ताने आचे हाय सबुर रचना करला।

उत्पति पाठ 1-2 ले बाइबल तानर गोटक कावनी

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