27. दयालु सामरी की कहिनी

27. दयालु सामरी की कहिनी — चित्र 1

एक दिन, यहूदी व्यवस्था को एक जानकार यीशु के जवर आइस। ही सप्पाई को यो दिखाना चाहता होतीस कि यीशु गलत प्रकार से शिक्षा दे रही हय। एकेगुना ओने कहिस, "हे गुरु, अनन्त जीवन पान के गुना मय का करूँ?" यीशु ने उत्तर देइस, "परमेश्वर की व्यवस्था में का लिखो हय?"

27. दयालु सामरी की कहिनी — चित्र 2

हु मानुष ने कहिस, "व्यवस्था कहते कि अपने परमेश्वर से अपने सारे मन, प्राण, शक्ति, अऊर बुद्धि से प्यार रख। अऊर अपने पड़ोसी से अपने सारखो प्यार रख।" यीशु ने जवाब देइस, "तू एकदम सही कहेस! अगर तू असो करबेन, तो तोको अनन्त जीवन प्राप्त होये।"

27. दयालु सामरी की कहिनी — चित्र 3

पर हु व्यवस्था का जानकार लोगनाऊन को दिखानो चाहत होतीस कि ओको जीवन जीन का तरीका सही होतीस। एकेगुना ओने यीशु से पूछिस, "ठीक हय, तो मोरो पड़ोसी कोन आय?"

27. दयालु सामरी की कहिनी — चित्र 4

यीशु ने वा व्यवस्था के जानकार को एक कहिनी बतान के जरिया से जवाब देइस। "एक यहूदी मानुष होतीस जो एक रस्ता से होयके यरूशलेम से यरीहो की किना यात्रा करत होतीस।"

27. दयालु सामरी की कहिनी — चित्र 5

पर कई डाकुनाऊन ने ओको देखीन अऊर ओको पे हमला करिन। हुनने ओको सप्पाई कई सामान ले लेइन अऊर ओको लगभग मरन की हालत तक मारीन-पीटीन। तब ही चले गइन।

27. दयालु सामरी की कहिनी — चित्र 6

ओके तुरन्त बाद, एक यहूदी याजक वाच रस्ता से होयके चले गइस। हु याजक ने हु मानुष को रस्ता पे पडो हुआ देखीस। जब ओने ओको देखीस तो हु रस्ता के दूसरे किना से जायके सामूर बढ़ गइस। ओने हु मानुष को पूरी रिती से अनदेखो कर देइस।

27. दयालु सामरी की कहिनी — चित्र 7

एके बाद थोड़ो समय बीतन के बाद, एक लेवीय मानुष वाच रस्ता से आइस। (लेवी, यहूदिनाऊन का एक गोत्र होतीस जिन्ने मंदिर में याजक नाऊन की मदत करे होतीन।) हु लेवी भी रस्ता के दूसरे किना से चलो गइस। ओने भी हु मानुष को अनदेखा कर देइस।

27. दयालु सामरी की कहिनी — चित्र 8

दूसरा एक मानुष जो वा रास्ता से आइस हु सामरिया को एक मानुष होतीस। (सामरी अऊर यहूदी एक-मेक से नफरत करत होतीन।) हु सामरी ने सड़क पे हु मानुष को देखीस। ओने देखीस कि हु यहूदी होतीस, पर फिर भी ओने ओके पे बडी दया करीस। अऊर हु ओके जवर गइस अऊर ओके घाव पे पट्टी बाँधींस।

27. दयालु सामरी की कहिनी — चित्र 9

फिर हु सामरी ने हु मानुष को अपने गधा पे बैठारीस अऊर उसे उस सड़क से एक सराय में लेके गइस। जहाँ पे ओने ओकी देखरेख करनो शुरू रखीस।

27. दयालु सामरी की कहिनी — चित्र 10

दुसरे दिन, हु सामरी को अपने यात्रा को शुरू रखन की जरूरत होती। ओने वा सराय के मुखिया को कुछ धन देइस। ओने ओके से कहिस, "हु मानुष की देखरेख करबेन। अगर यो धन से ज्यादा अऊर धन खर्च होये तो वापस आन पे मय तोरे खर्चा को भर दूँऊ।"

27. दयालु सामरी की कहिनी — चित्र 11

तब यीशु ने हु व्यवस्था के जानकार से पुछिस, "तुम का सोचतव? ही तीन लोगनाऊन में से कौन हु मानुष को पड़ोसी आय जेको लूटके मार-पीटो गइतीस?" ओने जवाब देइस, "हु जो ओके पे दया करे होतीस।" अऊर यीशु ने ओके से कहिस, "तू जा अऊर असोच कर।"

लूका अध्याय 10:25-37 से बाइबल की एक कहिनी

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