3. भाड़ी

3. भाड़ी — चित्र 1

खुबे डीनर पाचे संवसार ने खुबे लोकमन रयते रेलायहांय मन खुबे गिनगीना आवरी उबागरी होई रेलाय हांय मन खुबे गिनगीना रयेत कि मापरु गोटक बड़े पुर ले इ संवसार के नास करबा बिचार करला।

3. भाड़ी — चित्र 2

मातर मापरु नुह ले हरिक रेला। हांय गिनगीना माने मनर मंजीगता रेबा बीता गोटक धरमी माने रेला। मापरु नुह के सांगला की हांय गोटक बड़े पुर के आनुआय बे। एतारी लागी हांय नुह के गोटक बड़े डोंगा बनायबा काचे बल्ला।

3. भाड़ी — चित्र 3

मापरु नुह के उनापुरा १४० मीटर लोम, २३ मीटर ओसार १३.५ मीटर डेंग डोंगा बनायबा काचे बल्ला। नुह के हांके दारु ले बनायबार रेला आवरी हायंती ३ मंजील खुबे सारा बाकरा, गोटक छानी आवरी गोटक खिड़की बनायबार रेला । हांय डोंगा नुह तिकर घरर लोक आवरी भुई र सबु परकार र जानवर मन के हांय पुर ले बचायसी।

3. भाड़ी — चित्र 4

नुह मापरु र गोट दरला। हांय आवरी हांतार पीला झिला मन असनी च डोंगा बनायलाय जसन मापरु सांगी रेला काय काचे कि हांय डोंगा खुबे बड़े रेला हांय काचे हांके बनायबा काचे खुबे बरस लागला। नुह लोकमन आयबा बीती पुर आयसी बोली सांगी रेला आवरी तीके मापरु बाटे आसा बल्ला। मातर हांय मन हांतार गोट के सत ना करलाय।

3. भाड़ी — चित्र 5

मापरु नुह आवरी तिकर घरर लोक के आपना काचे आवरी जानवर मन के पुरबा अतक भात साग कूड़ा करबा काचे बले बल्ला। सबु जोमक जोडला पाचे मापरु नुह के बल्ला ए बेरा हांतार, हांतार बायले के आवरी हांतार तीन झन बीटा के आवरी तिकर बायले मन सबु मीसी करी ८ झन के डोंगा ने जीबार रेलाय।

3. भाड़ी — चित्र 6

मापरु सबु जानवर मन आवरी चेडे मनर माई आवरी फुरसा के नुह लगे पटायला कि हांय मन दोगा थाने जाई करी पुर ले बाचके सकोत। मापरु अन्ति सबु परकार र जानवर मन के माई आवरी फुरसा डोंगा ने पटायला तीके जतरा करबा काचे संगाय रेला। हांय सबु दोंगा ने खेटबा के मापरु खुद डोंगा र खिड़की के ढापी देला।

3. भाड़ी — चित्र 7

तेबे बरसा होयबार चालु होयला आवरी बरसा होयते गला, होयते गला। ना ठेबी करी चालीस दिन आवरी चालीस रागती बोरसा होयते रेला। संवसार र सबु तीज आवरी हांयतिर डेंग डेंग डोंगरी बले पानी ने बुड़ी गला।

3. भाड़ी — चित्र 8

सुका भुई थाने रेबा बीती सबुटा मरी गलाय हांय लोक आवरी जानवर मन के छाडी करी जों डोंगा ने रेलाय। हांय डोंगा पानी ने पोंहरते रेला आवरी डोंगा भीतर र सबु जीव के बुडबा ले बचाय करी संगायला।

3. भाड़ी — चित्र 9

बरसा ठेबला पाचे, पांच मास तक हांय डोंगा पानी उपरे पोंहरते रेला आवरी हांय दाय पानी कम होयके लागला तेबे गोटक दिन हांय डोंगा गोटक डोंगरी मुंडी ने जाई टिकला, मातर संवसार एबे बले पानी ले ढाकी होई रेला। तीन मास र पाचे डोंगरी मुंडी दका देयके लागला।

3. भाड़ी — चित्र 10

पाचे आवरी चालीस दिन र पाचे नुह गोटक कावरा के ए दकबा काचे बाहरे पठायला कि हांय पानी सुकी जाई रेला। हांय कावरा सुकला भुई के डगरायबा काचे एने हाने उड़ते रेला। मातर हांके असन कोनी जागा ना मिरला।

3. भाड़ी — चित्र 11

पाचे नुह गोटक पोरुआं के बाहरे पथायला, मातर हांके बले कोनी सुकला भुई ना मिलला हांई काचे हांय नुह लगे आवरी आई गला। सात दिन र पाचे हांय पोरुआं के आवरी पठायला आवरी हांय हांतार चोंडी ने जैतून र गोटक खेंदी दरीकरी आयला। पानी उना होयते रेला आवरी बूटा मन आवरी बाड़ते रेला।

3. भाड़ी — चित्र 12

नुह सात दिन आवरी टाकला आवरी तीसर हार पोरुआं के बाहरे पथायला। ई हार हांके ठेबबार जगा मीली गला आवरी हांय लेवटी करी ना आयला। पानी सुकते रेला।

3. भाड़ी — चित्र 13

दुई मास र बाद मापरु नुह के बल्ला, एबर तुई आवरी तोर घर र आवरी सबु जनावर डोंगा ले निकरी जाहा आवरी खुबे सारा पीला झीला, नाती नतरा पाहा आवरी भुई के भोरी दियास, आवरी नुह आवरी हांतार घर र लोक बाहरे निकरी आयलाय।

3. भाड़ी — चित्र 14

नुह डोंगा ले बाहरे निकरी आयलार बाद हांय गोटक बेदी बनायला आवरी जतरा लाइक र, सबु परकार र जानवर मन ले दरी करी जतरा करला। मापरु हांय जतरा ले हरिक होयला आवरी नुह आवरी हांतार घर र लोक के आसीस देला।

3. भाड़ी — चित्र 15

मुई किरिया करबी आची कि माने मन बाटले करबा बीती गिनगीना काम र लागी करी मुई तेबले बले केबेई भुई के सराप ना देई आवरी पुर बाटल संवसार के नास ना करी काय काचे कि मनुस मन पिला दाय ले पापी आत।

3. भाड़ी — चित्र 16

पाचे मापरु हांतार किरिया र चिना के तार नाव ले गोटक बादरी धनुस के बनायला जेबे केबी बले बादरी ने धनुस दखा देउआय तेबे मापरु सुरता करसी कि हांय काय किरिया करला आचे आवरी असनी च हांतार लोक बले सुरता करबाय।

उत्पत्तिअध्याय 6-8 सेएकबाइबलकीबाइबलर एक कतानी

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