33. ३३. किसानके कथा

33. ३३. किसानके कथा — चित्र 1

एक दिन,यिसु समुन्दरके किनारे बहुत बरका अदमिसबके भिरके सिक्छा देइत रहे । तब यिसुके बात सुनेके लेल येतना न बहुत अदमिसब अएलख कि,बोलेके लेल बहुत जगह नहोएलाके कारन यिसु समुन्दरके छेवमे रहल डेङि उपरी चहरके बैठगेल आ अदमिसबके सिक्छा देबेलगलख ।

33. ३३. किसानके कथा — चित्र 2

तब यिसु यि कथा कहलख,“एकजना किसान बिया छिटेके लेल खेतमे गेल । जैसे उ बिया छिटलख तब कुछ बिया रस्तामे जा गिरलख,तब चिरैसब अएलख आ खागेल ।”

33. ३३. किसानके कथा — चित्र 3

आ कुछ बिया पथलाह जमिनमे जागिरलख,जहाँ कि माटी बहुत कम होएलाके कारनसे पथलाह जमिनमे परल बिया बहुत जलदी जामगेल,लेकिन ओकर जर माटिमे न गरलाके कारनसे जब रउद लगलख आ गरमी भेल तब उ बियासब मौरगेल ।”

33. ३३. किसानके कथा — चित्र 4

कुछ बिया काटके झोखिमे जा गिरलख । तब उ बिया जामेला त जमलख माने काटसब ओकराके तोप देलख । ओहिसे काटके झोखीमे परल बिया फल फलाए नसकलख ।”

33. ३३. किसानके कथा — चित्र 5

लेकिन कुछ बिया निमन जमिनमे परलख । तब उ बिया जमलख आ ३०,गुना,६०गुना,आ १०० गुनासे बहुत फल फलैलख । जेकरा कान बा उ सुनो ।

33. ३३. किसानके कथा — चित्र 6

तब यि कथा सुनके चेलासब अलमलमे परगेल । ओहिसे यिसु चेलासबके बुझैलख,“ बिया परमेस्वरके बचन बा । रस्ता उ अदमी बा,जे परमेस्वरके बचन सुनैए,लेकिन उ नबुझैए,ओहिसे दुस्ट ओकरासे परमेस्वरके बचन छिनके लेजाइए ।“

33. ३३. किसानके कथा — चित्र 7

“पथलाह जमिन उ अदमी बा,जे परमेस्वरके बचन सुनैए आ बहुत खुसिके साथ बचनके स्वीकार करैए । लेकिन जब ओकरा उपरी कठिन परिस्थीके साथ सतावटके समना करै,तब उ बिसबाससे पछारी हट जाइए ।”

33. ३३. किसानके कथा — चित्र 8

“काटके झोखिमे परल बिया उ अदमी बा,जे परमेस्वरके बचन सुनैए,लेकिन जइसे-जइसे समय बितैत जाइए,जिबनके चिन्ता-फिकरी,धनसम्पती आ आनन्द,सुख-बिलासके कारन परमेस्वर परती ओकर बिसबासके तोप देइए । फलस्वरुप उ जे सुनै उ सिक्छासे ओकर जिबनमे कवनो फल नफलाइए ।

33. ३३. किसानके कथा — चित्र 9

“लेकिन असल जमिनमे परल बिया उ अदमी बा,जे कि,परमेस्वरके बचन सुनैए आ बिसबास करैए तब उ बहुत फल फलाइए ।”

बाइबलको कथा: मत्ती १३:१-८, १८-२३; मर्कूस ४:१-८, १३-२०; लूका ८:४-१५ बाट

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