2. ०२. सन्सारमे पापके सुरु

2. ०२. सन्सारमे पापके सुरु — चित्र 1

परमेश्वर वैनहनके लग बनाइल सुग्धर बगियामे आदम ओ हव्वा बहुत खुसीसे बैथल रहैं। दुनु जाने बिना लुगरा लगैले बैथैं; तौन्फे यी बातमे वैनहन कौनो लाज नाइ रहिन, काहेकी सन्सारमे पाप नाइ रहे। वैने बगीयामे घुम्ना ओ परमेश्वरसँगे बात बताईँ।

2. ०२. सन्सारमे पापके सुरु — चित्र 2

मने ऊ बगीयामे एकठो चत्तुर सपुवा रहे। ऊ जन्नी हे पुछल, “का जत्तिसे परमेश्वर तोनहन बगिया मे रहल कौनो रुखवाक फल नाई खइहो कहले बाटैँ?''

2. ०२. सन्सारमे पापके सुरु — चित्र 3

जन्नी बतइनीन, “परमेश्वर हमहान मजा ओ खराबके ग्यान देना रुखवाके फल नाई खईहो कहले बातैं। परमेश्वर हमहान कहले बातै! तुहुरे ऊ रुखवाके फल खईबो ओ छुबो किलतो तुहुरे मरजिबो।

2. ०२. सन्सारमे पापके सुरु — चित्र 4

तब् सपुवा जन्नीहिन कहल, " यी बात ठागल नाई हो। यी फल खाके परमेश्वर जस्ते हुईजिबो। ''

2. ०२. सन्सारमे पापके सुरु — चित्र 5

मजा ओ खराब ग्यान देना फल सुघ्घर ओ मिठ देख्निन्। ऊ फे बुद्धिमान हुइना चाहानिन्, तबे बगीया मनसे फल तुरके खालेलिन्। ओर ऊ आदमहे फे फल देनिन् ओ आदम फे उहे फल खइनई।

2. ०२. सन्सारमे पापके सुरु — चित्र 6

एक्चोत्ते वैनके आँखी खुल्निन्, ओ वैने अप्ने आपहे नङ्गा रहल पता पइनै। तब वैने पट्याक लुग्गा बनाके अपन देँह हे छोप्नै।

2. ०२. सन्सारमे पापके सुरु — चित्र 7

तब् आदम ओ हुकार जन्नी बगीयामे परमेश्वर नेङती रहल अवाज सुन्नै। वैने (ओइने ) दुनुजाने नुक्नै। तब् परमेश्वर आदमहे बोलाके कहनै, “तइँ कहाँ बाते?'' आदम कहनै, “मइँ नेङगत् सुन्नु तो डरइनु, काहेकी मइँ नङ्गा रहुँ। उहेमारे मै नुके (नुक्नु )

2. ०२. सन्सारमे पापके सुरु — चित्र 8

तब् परमेश्वर पुछ्नै, “तइँ नङ्गा बाते कैके तुहिन के कहल्? का मइँ जोन रुखवाक फल नाइ खाइस कले रहु तइँ उहे खईले?'' आदम जवाफ देहेल्, “जोन जन्नी (स्त्री ) देले रहो उहे महिन् यी फल देहेल। तब् परमेश्वर जन्नीहे(स्त्री हे ) पुछ्नै तइँ यी का कर्ले?'' जन्नी (स्त्री )कहनिन्, “(उ )सपुवा महिन् ठागल (लुक्झुकुवा देहल )तबे मइँ खईनु।

2. ०२. सन्सारमे पापके सुरु — चित्र 9

परमेश्वर सपुवाहे कनई, “तइँ स्रापित हुइलबाटे।

2. ०२. सन्सारमे पापके सुरु — चित्र 10

ओकर पाछे परमेश्वर जन्नी (स्त्री) हे कनै, “मइँ तोर लर्का पाइबेरिक पिडा ज्यादा बरहादेम। तबु फेन तोर इच्छा तोर थरुवाक ओर रही, ओ उ तुहिन अधिकार करी।”

2. ०२. सन्सारमे पापके सुरु — चित्र 11

परमेश्वर आदमहे (मनइया हे) कहनै, “तइँ अपन जन्नीक् बात सुन्के मोर बात नाइ मनलेक ओरसे यी जमिन तोर कारणसे स्रापित हुइलबा। खाइक लग तइँ ज्यादा मेहेनत कर्बे। तब् तइँ मुबे, ओ तोर् शरीर माटीमे मिली। '' मनइया (आदम) अपन जन्नीक नाउँ हव्वा धर्नै। जेकर मतलब् “जीवन देहुइया हो।” काहेकी ऊ सक्कु जातिनके दाइ कहलइनिन्। तब् परमेश्वर आदम ओ हव्वा हे जनावरके छालाके लुग्गा बनाके लगादेनै।

2. ०२. सन्सारमे पापके सुरु — चित्र 12

तब् परमेश्वर कहनै, “अब् मनई हुक्रेफे हमार जैसिन मजा ओ खराब जन्ना हुइगिल बातै। उहे मारे वैने (ओइने) अब जीवनके रुखवाके फल खाके सदा दिन जित्ती रहे नाइपईही कैके परमे‌श्वर आदम ओ हव्वा हे ऊ सुघ्घर बगीया मसे निकार देनै। परमेश्वर जीवनके रुखवाके चौकीदारी करेक लग (शक्तिशाली) स्वर्गदुत हुक्रहन बगीयाके दवारमे लगइनै।

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